जहाँ तू बज़्म में बैठा रहेगा
वो कोना आईना बनता रहेगा
हवा की चाह है बुझना पड़ेगा
दीये की जिद है वो जलता रहेगा
यहाँ पर नामो-शोहरत की घुटन है
यहाँ क्या आदमी जिन्दा रहेगा
उसे ऊँचाइयों से क्या हो हाशिल
गिरेगा तो ही ये झरना रहेगा
वो पिछली बारिशों का है सताया
सिराहने जिसके ये छाता रहेगा
जिसे हो रास आयी हुक़्मरानी
वो किसका है भला तेरा रहेगा
तिरी यादें कहाँ तक साथ देंगी
सफर में साथ ये छाला रहेगा
ये पत्थर भी यहाँ पर बोलते हैं
तू है 'निस्तेज' तू गूंगा रहेगा
निस्तेज